मन्नत वाले वटवृक्ष से लेकर दिव्य झरने तक—माता रेक्सी धाम बना भक्तों का आस्था-केन्द्र

यहां का वातावरण इतना पवित्र और अलौकिक है कि लोग न केवल दर्शन के लिए बल्कि प्रकृति का आनंद लेने और पर्यटन के उद्देश्य से भी यहां पहुंचते हैं। ऊंचे पर्वतों के बीच से गिरता लगभग 150–200 मीटर ऊंचा झरना यहां की पहचान है। यह झरना सालभर बहता रहता है, और भक्त यहां स्नान कर प्रकृति के इस अद्भुत उपहार का आनंद लेते हैं।

माता के दरबार में हमेशा भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।
यहां कोई मन्नत लेकर आता है, कोई जीवन की परेशानियों से मुक्ति की तलाश में। यह माना जाता है कि माता रेक्सी के चरणों में हर कष्ट का निवारण होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

यहां स्थित ‘मन्नत वाला वटवृक्ष’ भी भक्तों के विशेष आकर्षण का केंद्र है।
भक्त अपनी इच्छाओं को लाल कपड़े की पोटली में बांधकर इस वटवृक्ष पर टांगते हैं। जब उनकी मुराद पूरी हो जाती है, तो वे यही पोटली खोलकर माता का आभार प्रकट करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है।

माता रेक्सी स्थान पर बकरे की बलि देने की प्रथा भी प्रचलित है। खास बात यह है कि बलि से पहले बकरे के गले में कोई रस्सी नहीं होती। उसे सिर्फ सामने खड़ा किया जाता है, जो पूर्ण श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

प्रकृति, अध्यात्म और आस्था का यह अद्भुत मेल माता रेक्सी स्थान को एक चमत्कारी धाम बनाता है। यहां आने वाला हर भक्त मां की कृपा से भावविभोर होकर लौटता है।

रेक्‍सी धाम से रिपोर्ट — संजीत गोस्वामी,
ऑल इंडिया मीडिया एसोसिएशन | जन-जन की आवाज़
🇳🇪जय हिंद, जय भारत।🇳🇪

साहिबगंज।
प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्य शक्ति का संगम माने जाने वाले माता रेक्सी स्थान में आज भी भक्तों की आस्था की अविरल धारा देखने को मिलती है। रामपुर स्टेशन के बिलकुल पास स्थित यह प्राचीन धाम हर दिन हजारों श्रद्धालुओं की आस्था को अपने में समेटे हुए है।

यहां का वातावरण इतना पवित्र और अलौकिक है कि लोग न केवल दर्शन के लिए बल्कि प्रकृति का आनंद लेने और पर्यटन के उद्देश्य से भी यहां पहुंचते हैं। ऊंचे पर्वतों के बीच से गिरता लगभग 150–200 मीटर ऊंचा झरना यहां की पहचान है। यह झरना सालभर बहता रहता है, और भक्त यहां स्नान कर प्रकृति के इस अद्भुत उपहार का आनंद लेते हैं।

माता के दरबार में हमेशा भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।
यहां कोई मन्नत लेकर आता है, कोई जीवन की परेशानियों से मुक्ति की तलाश में। यह माना जाता है कि माता रेक्सी के चरणों में हर कष्ट का निवारण होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

यहां स्थित ‘मन्नत वाला वटवृक्ष’ भी भक्तों के विशेष आकर्षण का केंद्र है।
भक्त अपनी इच्छाओं को लाल कपड़े की पोटली में बांधकर इस वटवृक्ष पर टांगते हैं। जब उनकी मुराद पूरी हो जाती है, तो वे यही पोटली खोलकर माता का आभार प्रकट करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है।

माता रेक्सी स्थान पर बकरे की बलि देने की प्रथा भी प्रचलित है। खास बात यह है कि बलि से पहले बकरे के गले में कोई रस्सी नहीं होती। उसे सिर्फ सामने खड़ा किया जाता है, जो पूर्ण श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

प्रकृति, अध्यात्म और आस्था का यह अद्भुत मेल माता रेक्सी स्थान को एक चमत्कारी धाम बनाता है। यहां आने वाला हर भक्त मां की कृपा से भावविभोर होकर लौटता है।

रेक्‍सी धाम से रिपोर्ट — संजीत गोस्वामी,
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