
धोरैया प्रखंड क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम एवं क्लीनिकों के खिलाफ मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। बांका सिविल सर्जन के निर्देश पर गठित जांच दल ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर चार क्लीनिकों को सील कर दिया। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद मौके पर भर्ती मरीजों को सरकारी एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धोरैया भेजा गया।
छापेमारी दल में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी, जिला गुणवत्ता यकीन सलाहकार डॉ. जावेद अली, प्रभारी जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार, बीडीओ अरविंद कुमार, थानाध्यक्ष अमित कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपक कुमार एवं स्वास्थ्य प्रबंधक ए.के. श्यामला शामिल रहे।

जांच के दौरान टीम ने पाया कि कई निजी क्लीनिक बिना वैध निबंधन एवं आवश्यक कागजात के संचालित किए जा रहे थे। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कुछ स्थानों पर योग्य चिकित्सकों की अनुपस्थिति में मरीजों का इलाज और सर्जरी की जा रही थी। सबसे गंभीर बात यह पाई गई कि ऑपरेशन के दौरान मरीजों को बेहोश करने के लिए न तो एनेस्थीसिया विशेषज्ञ मौजूद थे और न ही मानक के अनुरूप आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं। अधिकारियों ने इसे मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ माना।
कार्रवाई के दौरान कुरमा स्थित मेडी क्लीनिक से दो एवं जेआरडी क्लीनिक से दो मरीजों को सुरक्षित निकालकर सरकारी एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धोरैया भेजा गया, जहां उनका इलाज चिकित्सकीय निगरानी में कराया जा रहा है।
जांच के बाद मेडी क्लीनिक कुरमा, पॉली क्लीनिक श्रीपाथर, उर्वशी पॉली क्लीनिक पटवा एवं जेआरडी क्लीनिक धोरैया को सील कर दिया गया। वहीं धोरैया बाजार स्थित डीएन चौधरी क्लीनिक छापेमारी के समय बंद पाया गया। जांच दल ने क्लीनिक संचालक को 24 घंटे के भीतर निबंधन सहित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम एवं क्लीनिक संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी कर संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा।
